राज्य विधान मण्डल (State Legislative Assembly)

सविधान के अनुच्छेद 168 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक विधान मण्डल होगा जो राज्यपाल जहाँ किसी राज्य के विधान मण्डल के दो सदन विधान परिषद और विधान सभा तथा जहाँ केवल एक सदन विधान सभा से मिलकर विधान मण्डलों का गठन होगा। 
राज्य विधान मण्डल के तीन अंग हैं -
1. राज्यपाल    2. विधान सभा     3. विधान परिषद

विधान सभा - Assembly

  • जिन राज्यों में विधान मण्डल एक सदनीय है, उसे विधान सभा तथा जिन राज्यों में विधान मंडल द्विसदनीय है वहाँ एकसदन विधानसभा तथा दूसरा सदन विधान परिषद कहलाता है।
  • अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद को अधिकार प्राप्त है कि राज्य में विधान परिषद की स्थापना अथवा अन्त कर दें, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा अपने कुल बहुमत व उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो- तिहाई बहुमत से इस आशय का प्रास्तव पास करें।
  • अनुच्छेद 170 के अनुसार राज्य की विधानसभा के सदस्यों अधिकतम संख्या 500 और न्यूनतम संख्या 60 होगी।
  • अपेक्षाकृत कुछ छोटे राज्यों के निर्माण के पश्चात अब उन राज्यों की न्यूनतम संख्या घटा दी गई है। सिक्किमत्र, अरूणाचलप्रदेश गोवा के लिए न्यूनतम संख्या 30 है और मिजोरम के लिए 40 है। 
  • 84 वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा 2026 तक लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ाने पर रोक लगा दी गई है।
  • जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सदस्यों की संख्या 100 है लेकिन 24 चुनाव क्षेत्र पाकिस्तान के क्षेत्रों में है।
  • 1974 के परिसीमन आयोग द्वारा विधान सभा के क्षेत्रों को निर्धारित किया गया है। 
  • 109वाँ संविधान संशोधन 2009 द्वारा विधेयक को 2020 तक के बढ़ा दिया है।
  • राज्य विधानसभा का कार्यकाल 5 वर्ष हैं किन्तु राज्यपाल द्वारा इस समय से पहले भी भंग किया जा सकता है। 
  • संकट काल की स्थिति में कार्यकाल संसद द्वारा एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ा सकती हैं किन्तु संकट काल की घोषणा समाप्त होने पर 6 माह की अवधि से अधिक नहीं।


विधान सभा की सदस्यता के लिए उम्मीदवार को -

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसकी आयु कम से कम 25 वर्ष हो।
  3. भारत सरकार के अधीन या राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो।
  4. वह संसद या राज्य विधान मण्डल द्वारा निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो।
  5. अनुच्छेद 173 के तहत वहीं योग्यता है जो लोक सभा के सदस्यों के लिए निर्धारित है। 


गणपूर्ति -
जब विधानसभा में कम से कम 10 प्रतिशत सदस्य उपस्थित हो लेकिन उनकी संख्या 10 से कम न हो तभी विधानसभा के सदन की कार्यवाही शुरू होगी।
विधान सभा का सत्र वर्ष में दो बार होना चाहिए किन्तु किन्हीं दो सत्रों के मध्य 6 माह से कम का समय नहीं होना चाहिए।

पदाधिकारी -

राज्य विधान सभा की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राज्य विधान सभा के सदस्य अपने बीच से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करते है। 

अध्यक्ष (Speaker) -

  1. विधानसभा बैठक की अध्यक्षता करता है।
  2. सदन में शांति और व्यवस्था तथा शिष्टाचार बनाये रखता है।
  3. किसी प्रश्न पर मतदान कराता और परिणाम की घोषणा करता है।
  4. किसी प्रश्न पर पक्ष और विपक्ष में बराबर मत आयें, तो वह ‘निर्णायक मत‘ का प्रयोग करता है।
  5. कोई विधेयक धन विधेयक नहीं है या नहीं इसका निर्णय अध्यक्ष करता है।
  6. भारतीय संविधान में राज्य विधायिका में संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान नहीं है। 
  7. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सभी कार्य उपाध्यक्ष करता है यदि दोनों अनुपस्थित है तो विधान सभा अपने सदस्यों में से एक कार्यवाहक अध्यक्ष चुनती है